राब्ता
अदावत भी हुई तुझसे मोहब्बत की तरह, हर बात में बस तेरा ज़िक्र निकल आता है। जितना भी चाहूँ फ़रामोश करना तुझे, उतना ही तू दिल के क़रीब चला आता है।
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